अस्सलामु अलैकुम नाज़रीन, आज के दौर में बहुत से मदरसों में तालीमी और इंतिज़ामी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लोगों से चंदा (ज़कात, सदक़ा, अतिया, फ़ितरा, फ़िदया, माहाना वग़ैरा) लिया जाता है।
आम तौर पर यह चंदा कलेक्शन एजेंटों के ज़रिये किया जाता है, जो अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से मदरसे के लिए मदद हासिल करते हैं। मौजूदा वक़्त में ज़्यादातर जगहों पर इसके लिए मैनुअल रसीद बुक का इस्तेमाल होता है।
इसमें चंदा देने वाले शख़्स का नाम, पता और दी गई रक़म हाथ से लिखकर रसीद दी जाती है।
इस तरीके में कई बार रिकॉर्ड संभालने में मुश्किल आती है, रसीद गुम हो सकती है या बाद में हिसाब-किताब मिलाने में परेशानी हो सकती है।
इन्हीं बातों को सामने रखते हुए एक डिजिटल मदरसा रसीद सिस्टम की तजवीज़ पेश की जा रही है।
इस सिस्टम को मैंने अपने वेबसाइट sofexindia.in पर इन्सटाल कर रखा है, जहाँ से पूरा चंदा कलेक्शन डिजिटल तौर पर दर्ज होगा और महफ़ूज़ रहेगा।
sofexindia.in की यह फ़्री-सर्विस है जो हम शुरू के दस मदरसों को देंगे।
इस वेबसाईट से मदरसे का एडमिन कभी भी अपने सारे डिटेल्स डाउनलोड कर सकते हैं।
इस सिस्टम में सबसे ऊपर सुपर एडमिन होगा।
सुपर एडमिन पूरे सिस्टम की निगरानी करेगा और ज़रूरत के मुताबिक कई मदरसों को इस प्लेटफ़ॉर्म में शामिल कर सकेगा।
हर मदरसे के लिए अलग-अलग एडमिन बनाए जा सकेंगे। इस तरह एक ही सिस्टम के तहत कई मदरसे अपने चंदा कलेक्शन का रिकॉर्ड मुनज़्ज़म तरीके से रख सकेंगे।
हर मदरसे के लिए एक मदरसा एडमिन होगा। यह शख़्स आम तौर पर मदरसे का हेड मुदर्रिस, प्रिंसिपल या इंतिज़ामिया कमेटी का सेक्रेटरी हो सकता है।
मदरसा एडमिन अपने मदरसे से मुताल्लिक तमाम सरगर्मियों की निगरानी करेगा और चंदा कलेक्शन करने वाले एजेंटों को सिस्टम में दर्ज करेगा।
मदरसे के तहत कई कलेक्शन एजेंट काम करेंगे।
ये एजेंट मुख़्तलिफ़ इलाकों में जाकर लोगों से मदरसे के लिए चंदा जमा करेंगे।
अक्सर मुसलमान लोग अपनी खुशी से यह चंदा देते हैं ताकि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों की तालीम और उनकी ज़रूरतें पूरी हो सकें।
जब कोई एजेंट किसी शख़्स से चंदा हासिल करेगा, तो वह उस शख़्स की मालूमात सिस्टम में दर्ज करेगा।
इसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर, दी गई रक़म और चंदा का मक़सद जैसी जानकारी शामिल होगी।
जैसे ही यह जानकारी दर्ज होगी, सिस्टम अपने आप एक डिजिटल रसीद तैयार कर देगा।
इस रसीद में मदरसे का नाम, रसीद नंबर, तारीख, चंदा देने वाले शख़्स का नाम, दी गई रक़म और कलेक्शन एजेंट का नाम जैसी तमाम ज़रूरी मालूमात मौजूद होंगी।
जैसे ही रसीद बनेगी, उसकी एक कॉपी अपने आप WhatsApp के ज़रिये चंदा देने वाले शख़्स के मोबाइल नंबर पर भेज दी जाएगी।
अगर देने वाले के पास मोबाइल नंबर न हो तो वह अपने किसी रिश्तेदार या जान-पहचान वाले के मोबाइल नंबर पर भी यह रसीद हासिल कर सकता है।
हर रसीद में एक QR Code भी मौजूद होगा।
इस QR Code को स्कैन करके कोई भी शख़्स यह तस्दीक़ कर सकता है कि यह रसीद सिस्टम में दर्ज है और किस शख़्स ने कितनी रक़म मदरसे के लिए दी है।
इस तरह नकली या फ़र्ज़ी रसीद बनने की गुंजाइश बिल्कुल खत्म हो जाती है और चंदा कलेक्शन का पूरा रिकॉर्ड बिल्कुल साफ़ और भरोसेमंद रहता है।
जब एजेंट के पास कुछ रक़म जमा हो जाती है, तो वह इसे वक़्त-ब-वक़्त मदरसा एडमिन के पास जमा कर देता है।
यह जमा हफ़्तेवार, महीनेवार या कलेक्शन की मिक़दार के मुताबिक कभी भी किया जा सकता है।
एडमिन सिस्टम में यह दर्ज करेगा कि किस एजेंट ने कितनी रक़म जमा की है, जिससे पूरे चंदा कलेक्शन का हिसाब हर वक़्त साफ़ तौर पर देखा जा सकेगा।
इस डिजिटल सिस्टम के ज़रिये मदरसों में चंदा कलेक्शन का तरीका ज़्यादा मुनज़्ज़म, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकता है।
इससे मदरसे की इंतिज़ामिया को भी आसानी होगी और चंदा देने वाले लोगों का एतिमाद भी मज़बूत होगा।
एजेंट जो रसीद लिखेंगे और जो रसीद डोनर को WhatsApp को मिलेगा उनका Sample नीचे देख सकते हैं।
इस ऐप के दूसरे हिस्से में हम जानेंगे कि एजेंट किस तरह और कितना अमाउंट एडमिन को जमा करेगा, और एडमिन एजेंट को कमीशन देने के बाद मदरसा फंड में कितना पैसा जमा होगा वगैरह।
अल्लाह हाफ़िज़